देहरादून के कोरोनेशन अस्पताल के डायलिसिस सेंटर पर उठे सवाल, मरीजों को इलाज न मिलने की शिकायत; जांच की मांग
देहरादून। कोरोनेशन अस्पताल, देहरादून में PPP मॉडल पर संचालित संजीवनी डायलिसिस सेंटर की व्यवस्थाओं को लेकर मरीजों एवं उनके परिजनों की शिकायतों के संबंध में उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के महानगर IT अध्यक्ष शिवांशु जायसवाल ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के महानिदेशक को लिखित ज्ञापन सौंपकर उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जाँच की माँग की है। ज्ञापन कार्यालय में जमा कराया गया है तथा उसकी प्राप्ति रसीद भी प्राप्त की गई है।
शिवांशु जायसवाल के साथ डायलिसिस से संबंधित समस्याओं को लेकर 8 मरीज एवं शिकायतकर्ता भी उपस्थित रहे। उनका कहना है कि डायलिसिस जैसी जीवनरक्षक चिकित्सा सेवा में किसी भी प्रकार की लापरवाही मरीजों के स्वास्थ्य और जीवन के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
शिकायत में डायलिसिस सेंटर में नेफ्रोलॉजिस्ट डॉक्टरों एवं प्रशिक्षित स्टाफ की उपलब्धता, पुरानी मशीनों के रखरखाव, डायलिसिस के बाद दवाइयों एवं इंजेक्शन की उपलब्धता, मरीजों के साथ व्यवहार तथा आयुष्मान भारत एवं अन्य सरकारी योजनाओं के अंतर्गत दर्ज रिकॉर्ड और भुगतान की पारदर्शिता जैसे मुद्दे उठाए गए हैं।
सबसे गंभीर मुद्दा मरीजों को डायलिसिस देने से कथित रूप से मना किए जाने का है। साथ आए मरीजों की शिकायत है कि कुछ मरीजों को डायलिसिस की सुविधा नहीं दी जा रही है और उन्हें दूसरे अस्पताल में जाने के लिए कहा जा रहा है। मरीजों का कहना है कि वे लंबे समय से डायलिसिस पर निर्भर हैं और समय पर उपचार नहीं मिलना उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। इस मामले में संबंधित अस्पताल एवं विभाग का पक्ष लेकर निष्पक्ष जाँच किया जाना आवश्यक है।

ज्ञापन सौंपने के दौरान उपस्थित मरीज एवं शिकायतकर्ता:
1. मुकेश नेगी
2. राजू
3. हरिक्ष सैनी
4. तजु सिंह
5. जितेन्द्र सिंह
6. सेजा़त अहमद
7. अनिल नेगी
8. राहुल पाठक
शिवांशु जायसवाल ने स्वास्थ्य विभाग से माँग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए, मरीजों को नियमानुसार डायलिसिस की सुविधा सुनिश्चित की जाए, मशीनों एवं स्टाफ की स्थिति की जाँच हो तथा सरकारी योजनाओं के रिकॉर्ड और भुगतान का सत्यापन किया जाए। यदि जाँच में किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही प्रमाणित होती है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि डायलिसिस जैसी जीवनरक्षक सेवा में मरीजों को इलाज के लिए भटकना न पड़े। प्रत्येक पात्र मरीज को नियमानुसार समय पर उपचार मिलना चाहिए। मरीजों के स्वास्थ्य और अधिकारों की रक्षा करना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

