दिल की बीमारी से बचाव के लिए लाइफस्टाइल पर दें ध्यान, तंबाकू-मोटापा और कोलेस्ट्रॉल को लेकर रहें सतर्क
दिल की बीमारियों को लंबे समय तक बढ़ती उम्र से जुड़ी समस्या माना जाता रहा है, लेकिन अब कम उम्र के लोगों में भी हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट जैसी गंभीर स्थितियां सामने आ रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जीवनशैली, खराब खान-पान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और तंबाकू के सेवन के कारण दिल की सेहत को लेकर कम उम्र से ही सतर्क रहने की जरूरत है।
विशेषज्ञों के मुताबिक परिवार में हार्ट डिजीज या डायबिटीज का इतिहास, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल जैसे कारक दिल की बीमारी का खतरा बढ़ा सकते हैं। ऐसे में नियमित हेल्थ चेकअप और रोजाना व्यायाम जैसी आदतें जोखिम कम करने में मददगार हो सकती हैं।
प्रसिद्ध हार्ट सर्जन डॉ. श्रीराम नेने का कहना है कि दिल की बीमारी को लेकर ध्यान केवल हार्ट अटैक के बाद इलाज तक सीमित नहीं होना चाहिए। बीमारी से बचाव, शुरुआती संकेतों की पहचान और समय पर उपचार पर भी बराबर ध्यान देने की जरूरत है। इससे लोगों के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।
कार्डियक सर्जन और मेदांता के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक डॉ. नरेश त्रेहान ने भी युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामलों पर चिंता जताते हुए लोगों को अपनी दिल की सेहत को लेकर सावधान रहने की सलाह दी है। उनके अनुसार, जिन परिवारों में हार्ट डिजीज और डायबिटीज का इतिहास रहा है, उन्हें 25 साल की उम्र से पहले स्वास्थ्य जांच शुरू करा लेनी चाहिए। वहीं, जिन लोगों के परिवार में ऐसी बीमारियों का इतिहास नहीं है, उन्हें भी डॉक्टर की सलाह के अनुसार 30 साल की उम्र से पहले जरूरी जांच कराने पर विचार करना चाहिए।
डॉ. त्रेहान के मुताबिक जीनोम सीक्वेंसिंग जैसी आधुनिक जांचों से भी आनुवंशिक जोखिमों को समझने में मदद मिल सकती है। परिवार की मेडिकल हिस्ट्री, ब्लड टेस्ट और जीवनशैली से जुड़ी जानकारी को साथ में देखकर दिल की बीमारी के संभावित जोखिम का आकलन किया जा सकता है।
पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया की रिसर्च एंड हेल्थ प्रमोशन डिविजन की वाइस प्रेसिडेंट प्रो. मोनिका अरोड़ा ने दिल की बीमारियों के बढ़ते मामलों के पीछे खराब जीवनशैली और खान-पान में बदलाव को अहम कारण बताया। उनके अनुसार पारंपरिक भारतीय भोजन की जगह जंक और प्रोसेस्ड फूड का सेवन बढ़ने से भी स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों ने तंबाकू के सभी रूपों से दूरी बनाने की सलाह दी है। इसमें सिगरेट के अलावा गुटखा और दूसरे तंबाकू उत्पाद शामिल हैं। वेप और निकोटीन की लत को भी दिल की सेहत के लिए जोखिमपूर्ण बताया गया है।
ग्लोबल मेटाबोलिक हेल्थ अलायंस के डॉ. अमित गुप्ता के अनुसार दिल की बीमारी के जोखिम को कम करने के लिए ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, वजन और शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी पर नियंत्रण रखना जरूरी है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और फैटी लिवर जैसे कारक दिल की बीमारी का खतरा बढ़ा सकते हैं।
विशेषज्ञों ने बच्चों में बढ़ते मोटापे को भी चिंता का विषय बताया है। वजन को नियंत्रित रखने की आदत बचपन से विकसित करने की सलाह दी गई है। वहीं, बुजुर्गों को नियमित रूप से ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और वजन की जांच कराने, डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लेने और समय-समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेते रहने पर जोर दिया गया है।

